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कर्ण हमारा शरीर है क्योंकि हम कर्णवंशी है किंतु श्री कृष्ण हमारी आत्मा है क्योंकि हम सनातनी है ( सनातन धर्म सर्वोपरि ) हमारा इतिहास हमे यह शिक्षा देता है कि धर्म के विरुद्ध हो कर कभी कोई विजय नहीं हो सकता एवं स्त्री हर रूप में पूज्यनीय है कर्ण के कंठ से याज्ञसैनी के लिए अपशब्द और मित्र दुर्योधन के लिए रक्त वचन निकले थे इसी लिए प्रभु श्री कृष्ण ने अर्जुन से कर्ण के कंठ की ओर इशार करते हुए कहा था "अंजलिका अस्त्र चलाओ पार्थ मुक्त करो अंग राज कर्ण को उनके द्वारा मित्र दुर्योधन को दिए हुए वचन से"