त्रिपुरी कल्चुरी वंश से कर्ण वंश का संबंध
त्रिपुरी कल्चुरी वंश को समझने के लिए हैहय वंश को शुरुआत से समझते है 1. पौराणिक/प्राचीन पाँच प्रमुख कुल (शाखाएँ) पुराणों के अनुसार, हैहय वंश मुख्य रूप से पाँच प्रमुख कुलों या शाखाओं में विभाजित था: 1वीतिहोत्र (Vitihotra) 2.शर्यात (Sharyata) 3.भोज (Bhoja) 4.अवन्ति (Avanti) 5.तुंडिकेरा (Tundikera) इसकी प्रारंभिक और सबसे प्रसिद्ध राजधानी नर्मदा नदी के तट पर स्थित महिष्मती (वर्तमान महेश्वर, मध्य प्रदेश) थी, और इसके सबसे प्रतापी राजा कार्तवीर्य अर्जुन (सहस्रबाहु) थे। 2. ऐतिहासिक एवं मध्यकालीन कलचुरी (हैहय) शाखाएँ 10वीं से 18वीं शताब्दी के दौरान, हैहय वंश के वंशज कलचुरी नाम से उभरे और भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इनकी प्रमुख शाखाएँ स्थापित हुईं: 1.त्रिपुरी के कलचुरी (चेदी शाखा) यह मध्य प्रदेश के ऊपरी नर्मदा घाटी क्षेत्र (त्रिपुरी/जबलपुर के पास) में केंद्रित थी।इसकी स्थापना कोकल्ल प्रथम ने की थी। जिससे आगे चलकर कर्णवंश की वंशावली जुड़ गई और कर्ण उपनाम का प्रचलन हुआ पुरी कलचुरियों की प्रमुख ऐेतिहासिक वंशावली कोक्कल प्रथम | शंकरगण प्रथम | वालहर्ष ...