लावन पुरा में स्वप्न के माध्यम से आई जगत् जननी जगदंबा के शक्ति स्वरूप की प्रतिमाओं के आगमन और स्वप्न में वर्णित देवगढ़ और राजा पूर्णिया का ऐतिहासिक रहस्य
लावन पुरा में स्वप्न के माध्यम से आई जगत् जननी जगदंबा के शक्ति स्वरूप की प्रतिमाओं के आगमन और स्वप्न में वर्णित देवगढ़ और राजा पूर्णिया की ऐतिहासिक रहस्य कुछ इस प्रकार है कई वर्ष बीत जाने के उपरांत भी ऐसा कोई इतिहास नहीं मिला जहां देवगढ़ का किला और पूर्णियाँ नाम के राजा का ज़िक्र ही किन्तु सामूहिक चर्चा में जब पता चला कि पथरी गढ़ को ही देवगढ़ कहा जाता था तो कान चौकन्ने हुए देवगढ़ का जब इतिहास जाना तो पता चला कि देवगढ़ में कभी पुण्यपाल नाम का प्रतापी राजा हुआ जिनके राज्य की सीमा पवाया (भितरवार) , करैरा तक फैली हुई थी वर्तमान में भितरवार में हुई खुदाई में प्राचीन राज्य पवाया की पुष्टि की गई है गाँव लावन पुरा के 2km दायरे में एक घड़ी हुआ करती थी जिसे देवगढ़ की घड़ी कहा जाता था जिससे प्रतीत होता है कि यहां तक महाराज पुण्यपाल के राज्य की सीमाएं थी महाराज पुण्यपाल के वंश का कोई प्रमाणित उल्लेख तो नहीं है कि वो किस वंश के थे किंतु इतिहास कारों ने परमार वंश से उन्हें जोड़ा है *किंतु दिलचस्व बात यह है कि कुछ इतिहासकार महाराज पुण्यपाल का संबंध ग्वालियर के तोमर राज घराने से जोड़ते है और पुण्यप...