कर्णवंशी क्षत्रिय जाति की उत्पत्ति ( कर्ण राजपूत समाज का इतिहास )
मत्स्य पुराण के २६ वे अध्याय का ४२ वा श्लोक पेज न.२२७- २२८ कर्ण राजपूत वंश कि उत्पत्ति:- कर्ण राजपूत वंश कि उत्पत्ति महाभारत के महान योद्धा दानवीर कर्ण से हुई है , दानवीर कर्ण का जन्म महऋषि दुर्वाषा के दिए हुए वरदान स्वरूप माता कुंती से भगबान सूर्य के आशीर्वाद से हुआ इसलिए कर्ण को सूर्य पुत्र कर्ण कहा जाता है , बचपन से ही कर्ण के पास भगवान सूर्य नारायण का दिया हुआ दिव्य कवच कुंडल था ,जिसे सूर्य पुत्र कर्ण ने देवराज इंद्र को धर्म कि रक्षा हेतु दान में दे दिया था कर्ण कि परिवरिश अधिरथ ने कि थी और कर्ण को राधे मा का स्नेह मिला था इसलिए कर्ण को राधेय कर्ण भी कहा जाता है सूर्य पुत्र कर्ण पांडवो के ज्येष्ठ भ्राता और कुरु युवराज दुर्योधन के मित्र थे इसलिए कुरु युवराज दुर्योधन ने कर्ण को अंग देश का राजा घोषित करने का निर्णय लिया उस समय अंग देश के राजा विश्वजीत की कोई संतान न होने के कारण अंग देश हस्तिनापुर के शरंक्षण में था कुरुराजकुमार कि घोषणा के बाद कुरुपती ने सूर्य पुत्र कर्ण को महाराज विश्वजीत का उत्तराधिकारी बनाकर अंग देश का सम्राट नियुक्त कर दिया और इस प्रकार सूर्य पुत्...

Jai Dada karna
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