कर्णवंशी क्षत्रिय ( कर्ण राजपूत ) समुदाय के अस्तित्व की प्रमाणिक पुष्टि
20 वी शताब्दी में कर्ण वंश का अस्तित्व चौथी शताब्दी में भारतेंदु हरिचंद्र में कर्ण वंश के अस्तित्व का प्रमाण दूसरी शताब्दी में मुद्रा राक्षस से कर्ण वंश के अस्तित्व का प्रमाण छठी शताब्दी में कर्ण वंश की पुष्टि राजतरंगिणी के पंचम तरंग से भारतेन्दु समग्र के पेज क्रमांक ३७६ में एवं मुद्राराक्षस के पेज क्रमांक ४४३ में इतिहासकार 200; ईस्वी से 400 ईस्वी तक कर्णवंशी बौद्ध राजाओं को मगध का राजा बताया है राजतरंगणी के पंचम तरंग के पेज क्रमांक ३८३ में लिखा हुआ है छठी शताब्दी के कर्णवंश का शासन राजस्थान के गुर्जर प्रदेश पर था उडड़ नामक राजकुमार ने दक्षिण गुर्जर में भड़ौच का राज्य स्थापित किया था इसके अलावा सप्तम तरंग एवं अष्टम तरंग में भी कर्ण नाम के राजाओं का वर्णन है कुछ इतिहासकार इन्हें कल्चुरी राजा कर्ण जोकि त्रिपुरी चेदी नरेश थे उनका वर्णन मानते है